शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन 2025: तियानजिन से उभरा नया वैश्विक दृष्टिकोण
SCO Summit
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 25वीं वार्षिक शिखर बैठक 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच चीन के तटीय शहर तियानजिन में संपन्न हुई। इस वर्ष की बैठक को संगठन के इतिहास की सबसे व्यापक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समिट माना जा रहा है।
चीन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक की थीम रही: "Upholding the Shanghai Spirit: SCO on the Move"। समिट का केंद्र बिंदु था - सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, और वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सशक्त करना।
मुख्य घोषणाएँ
- SCO विकास बैंक की स्थापना की घोषणा, जो सदस्य देशों में बुनियादी ढांचा, डिजिटल कनेक्टिविटी और हरित ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करेगा।
- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर की योजना, जिसमें मध्य एशिया में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से ऊर्जा का निर्यात शामिल है।
- चीन द्वारा SCO देशों को 2 अरब युआन की आर्थिक सहायता, खासकर ऊर्जा, कृषि और तकनीकी नवाचार क्षेत्रों में सहयोग हेतु।
- डिजिटल मुद्रा और युआन में व्यापार को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव, जिसे कुछ सदस्य देशों का प्रारंभिक समर्थन प्राप्त हुआ।
सदस्य देशों की भागीदारी
बैठक में भारत, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान सहित SCO के पूर्णकालिक और पर्यवेक्षक देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया।
- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने संगठन के रणनीतिक समन्वय को नया आयाम दिया।
- भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा लिया, जिनकी उपस्थिति ने क्षेत्रीय संतुलन और संवाद को मजबूती प्रदान की।
समिट में एक नया वैश्विक शासन तंत्र (Global Governance System) प्रस्तावित किया गया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र में सुधार, बहुपक्षीयता को पुनर्परिभाषित करने और क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका को विस्तार देने की बातें की गईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि SCO अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बहुआयामी सहयोग मंच बन चुका है - जिसमें भू-राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सभी आयाम शामिल हैं।
तियानजिन में संपन्न SCO शिखर बैठक ने यह संकेत दिया है कि एशिया और यूरेशिया में एक नया भू-राजनीतिक संतुलन आकार ले रहा है। संगठन की भविष्य की दिशा आर्थिक एकीकरण, ऊर्जा सहयोग और बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था के निर्माण की ओर संकेत कर रही है।




Shubham 